सरकार ने कर कम किया, पंप पर दाम नहीं घटे: पेट्रोल-डीजल भाव आज स्थिर
मार्च, 28 2026
मंगलवार की सुबह जब लोग अपने इंधन टैंकर भरने गए, तो उन्हें वह राहत नहीं मिली जिसे वे उम्मीद कर रहे थे। 28 मार्च 2026 को देश भर में पेट्रोल और डीजल के भाव स्थिर रहे, भले ही सरकार ने हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती की घोषणा की थी। अजीब बात यह है कि सरकार ने पेट्रोल पर कर 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये कर दिया और डीजल पर कर पूरी तरह खत्म किया, फिर भी रिटेल प्राइस पर कोई असर नहीं पड़ा।
मुख्य शहरों में आज की कीमतें और स्थिति
दिल्ली में आज पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर पर बना रहा, जबकि डीजल 87.67 रुपये था। वहीं, मुंबई में स्थिति और महंगा दिख रही थी। यहाँ पेट्रोल कीमत 103.49 रुपये से लेकर 103.54 रुपये के बीच थी। डीजल भी 90.03 रुपये के आसपास टिका रहा। अगर हम बेंगलुरु की बात करें, तो वहां पेट्रोल 102.90 रुपये और डीजल 89.02 रुपये था।
कोलकाता और हैदराबाद में भी भाव काफी ऊंचे हैं। हैदराबाद में पेट्रोल तो 107.50 रुपये तक पहुंच गया, जो कई लोगों के लिए चिंताजनक है। कुल मिलाकर, देश के बड़े शहरों में पेट्रोल 100 रुपये के अंकड़े को छू रहा है। इसमें चेन्नई, पुणे, और नागपुर जैसे शहर भी शामिल हैं जहां डीजल की कीमतें 90 रुपये से ऊपर हैं।
करों में कटौती का फायदा कहाँ गिरा?
केंद्र सरकार ने कर संरचना बदली, पर आम जनता का सवाल उठता है कि पैसा कहाँ रुका? जब आप टैंकर पर पंप लगते हैं, तो वहां सिर्फ एक ही नाम दिखता है - इंडियन ऑयल या IOCL। ये कंपनियां बताती हैं कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं।
यह विवाद कई सालों पुराना है। कंपनी कहती है कि अंतर्राष्ट्रीय दरें बढ़ रही हैं, इसलिए लोकल कर का घटना पूरे हिसाब में नहीं दिखा। दूसरी तरफ, उपभोक्ता मानते हैं कि यदि कर घट रहा है, तो उसका असर तुरंत होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि 'ब्रेनट क्रूड' की कीमतें अभी भी 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं, जिससे इंसुलेशन की लागत बढ़ गई है।
वैश्विक बाजार और भौगोलिक तनाव
इस स्थिरता के पीछे का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच की राजनीतिक स्थिति ने तेल के निर्यात को अनिश्चित बना दिया है। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर पड़ता है।
रुपये की कमजोरी का मतलब है कि हमें कच्चे तेल आयात करने के लिए ज्यादा अमेरिकी डॉलर देना पड़ता है। 2024-25 की तुलना में अब आयात लागत पहले से ही 10% तक बढ़ चुकी है। यही वजह है कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) तुरंत कीमतें नहीं कम कर पा रही हैं। उनके पास मौजूदा स्टॉक और भविष्य के अनुबंधों की भी जिम्मेदारी होती है।
प्राइसिंग सिस्टम और पिछला ट्रैक रिकॉर्ड
2017 में भारत ने 'डायनामिक प्राइसिंग मॉडल' अपनाया था। इससे पहले हर 15 दिन बाद भाव बदलते थे, अब सुबह 6 बजे रोजाना अपडेट होते हैं। इसे 'ट्रांसपेरेंसी' कहा जाता है, लेकिन वास्तविकता में यह ग्लोबल वॉल्टाइलिटि के साथ सीधा जुड़ गया है। पिछले 10 दिनों से मुंबई में पेट्रोल रेट 103.49 रुपये पर लगातार स्थिर रहा। यह स्थिरता कुछ हद तक राहत देने वाली है, क्योंकि हमेशा वृद्धि ही होती रहती है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है आगे?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर पश्चिम एशिया की स्थिति शांत नहीं हुई, तो मई के अंत तक कीमतें इसी स्तर पर बनी रहेंगी या थोड़ी बढ़ भी सकती हैं। सरकार का दावा है कि दीर्घकालिक योजनाएं महंगाई कम करेंगी, पर वर्तमान में परिवहन लागत बढ़ने का डर बना है। ट्रकों की लागत बढ़ने पर सब्जियों और खाद्य सामान की कीमतें भी प्रभावित होंगी।
एक और पहलू यह है कि कई राज्यों ने अपनी वैट दरें कम करवाई हैं। जैसे गुजरात या आंध्र प्रदेश में पेट्रोल दिल्ली से सस्ता हो सकता है। लेकिन अगर ओलियम (Global Oil Prices) में तेजी आई, तो यह अंतर कम हो जाएगा। आम नागरिक के लिए सबसे सुरक्षित सलाह यह है कि अपने उपयोग को कम रखें और हाइब्रिड विकल्पों की ओर ध्यान दें।
संदर्भ यह है कि 2026 के मार्च माह में इस तरह की स्थिरता अपेक्षाओं से कम है। अगर कर में कटौती का असर नहीं हुआ, तो आने वाले दो महीनों में नीतिगत बदलाव की उम्मीद है। कहीं न कहीं यह प्रश्न जरूर होगा कि कौन सी जिम्मेदारी किसकी है - सरकार की या कंपनियों की।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सरकार ने कर कम किया, तो दाम क्यों नहीं गिरें?
कंपनियों का कहना है कि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें और रुपये की कमजोरी ने कर कटौती का असर संतुलित कर दिया है। हालांकि उपभोक्ता मानते हैं कि फायदा तुरंत दिखाया जाना चाहिए।
कौन से शहरों में पेट्रोल सबसे सस्ता है?
वर्तमान में दिल्ली और चेन्नई के बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अन्य बड़े शहरों जैसे मुंबई या कोलकाता की तुलना में कम हैं। इसका कारण राज्य का GST दर अलग होने का है।
क्या कीमतें आने वाले हफ्ते में बढ़ेंगी?
जापानी बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर वृद्धि संभव है, लेकिन पिछले 10 दिनों में स्थिरता रही है। भविष्य अंतर्राष्ट्रीय तनाव पर निर्भर है।
इंद्रिय तेल संयंत्रें (IOCs) कैसे रेट तय करती हैं?
वे डायनामिक प्राइसिंग सिस्टम का उपयोग करती हैं जो दुनिया भर की औसत कीमतों, विनिमय दरों और कर के अनुसार रोजाना सुबह 6 बजे अपडेट होती हैं।